शत शत वंदन करुँ गुरु को,
जिन्होनें ज्ञान का प्रकाश फैलाया है l
दीपक उनको कोई क्या दिखलाए,
जिन्होंने ज्ञान का अलख जगाया है l
असंख्य लोगों मे हिम्मत भरकर
जिन्होंने संघर्ष करना सीखाया है l
उनको काई क्या गिराये,
जिन्होनें गिरते को भी उठाया है।
हारे हुए को सहारा देकर,
जिन्होनें जीत का ध्वज फहराया है l
उनको कोई क्या हराये,
जिन्होनें हारे हुए को भी जिताया है l
मां शारदे सा श्वेताम्बर जिसने,
अपने तन पर सजाया है l
उस पर कोई क्या कलंक लगाये,
जिस पर महाकाल की छाया है।
अनीता चमोली”अनू”
देहरादून उत्तराखंड




