
देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) में शिक्षक दिवस के अवसर पर जल शिक्षा कार्यक्रम के तहत विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। परिषद के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने हिमालयी जल संसाधनों, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने शिक्षक दिवस और हिमालय दिवस सप्ताह की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को सही दिशा देकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती आपदा जनित घटनाओं के प्रभाव को कम करने के लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास जरूरी हैं, जिसमें शिक्षकों और विद्यार्थियों की भूमिका अहम है।
कार्यक्रम में जेएनयू, नई दिल्ली के स्कूल ऑफ एनवायरमेंटल साइंसेज के प्रोफेसर पी.के. जोशी ने ‘हिमालय वॉटर रिसोर्सेस’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने जल संसाधन प्रबंधन, स्प्रिंगशेड मैनेजमेंट, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा हिमालयी क्षेत्रों में रिमोट सेंसिंग और GIS तकनीक के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जल शिक्षा में शिक्षकों की भूमिका और स्थानीय ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
यूकॉस्ट वैज्ञानिक एवं जल शिक्षा कार्यक्रम प्रभारी डॉ. भवतोष शर्मा ने कार्यक्रम के उद्देश्य और शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और इंटर कॉलेजों से जुड़े शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। संयुक्त निदेशक डॉ. डीपी उनियाल ने कार्यक्रम की उपयोगिता पर विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत के गायन से हुई। धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ. मंजू सुंदरियाल ने किया। कार्यक्रम में यूकॉस्ट के वैज्ञानिकों, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के स्टाफ तथा विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्राध्यापकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों सहित 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और विशेषज्ञ से अपने सवालों के जवाब प्राप्त किए।




