लोकगायक रोहित चौहान के टिहरी पर आधारित गीत ने पुरानी यादें कीं ताजा, गणमान्य अतिथियों ने किया पर्यावरण संरक्षण का आह्वान

देहरादून। रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में चल रहे भव्य रामलीला महोत्सव-2026 के पांचवें दिन को हिमालय संरक्षण दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान केवट लीला और राम-भरत मिलाप के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, लोकगायक रोहित चौहान के टिहरी की यादों से जुड़े गीत ने पुरानी टिहरी के दर्द को सुरों के माध्यम से जीवंत कर दिया।
श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी की ओर से आयोजित महोत्सव में भगवान श्रीराम की वनयात्रा के दौरान केवट प्रसंग को आकर्षक मंच सज्जा और तकनीकी प्रभावों के साथ प्रस्तुत किया गया। राम-भरत मिलाप के दृश्य में भाई के प्रति प्रेम, त्याग और समर्पण की भावना ने दर्शकों को प्रभावित किया।
कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक, महापौर सौरभ थपलियाल और पूर्व विधायक राजकुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समिति अध्यक्ष अभिनव थापर ने हिमालय, वनों और लोकसंस्कृति के संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि सांस्कृतिक आयोजन पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम हैं। अतिथियों ने भी धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ प्रकृति को बचाने का संदेश दिया।
वर्ष 1952 में पुरानी टिहरी से शुरू हुई रामलीला की परंपरा को शहर के जलमग्न होने के बाद देहरादून में आगे बढ़ाया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, वर्ष 2025 में रामलीला डिजिटल माध्यमों से 85 लाख से अधिक दर्शकों तक पहुंची थी। इस वर्ष एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम में शिवसेना प्रदेश अध्यक्ष गौरव कुमार, पूर्व UCOST निदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल, कांग्रेस के राष्ट्रीय संचार सचिव वैभव वालिया, ग्रीन बैंक संस्थापक चंदन सिंह नेगी, राज्य आंदोलनकारी मोहन सिंह खत्री सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
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