सीएम धामी की पहल बनी दूसरे राज्यों के लिए मॉडल, कार्यस्थल पर ही 44 प्रकार की निःशुल्क जांच की सुविधा
देहरादून, 17 अक्टूबर। उत्तराखण्ड सरकार की मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के अपर श्रमायुक्त जुनैद अहमद के नेतृत्व में पहुंची टीम ने देहरादून में योजना की कार्यप्रणाली और क्रियान्वयन व्यवस्था का अध्ययन किया। टीम ने निर्माण श्रमिकों को कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उत्तराखण्ड मॉडल की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जुलाई 2026 को इस योजना की शुरुआत करते हुए दो मोबाइल मेडिकल वैन को हरी झंडी दिखाई थी। इसके तहत निर्माण श्रमिकों को कार्यस्थल और आवास पर ही एक्स-रे, ईसीजी समेत 44 प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श की सुविधा दी जा रही है।
अब तक 60 हजार श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच
श्रमायुक्त एवं उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव प्रकाश चन्द्र दुम्का ने यूपी की टीम को योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 60 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल चुकी है। योजना के तहत गंभीर बीमारियों की पहचान, चिकित्सकीय परामर्श और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफरल की व्यवस्था भी की गई है।
यूपी में भी लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा
उत्तर प्रदेश की टीम ने श्रमिकों के पंजीकरण, स्वास्थ्य जांच शिविरों, रिपोर्ट उपलब्ध कराने और गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए रेफरल प्रक्रिया को समझा। बैठक में उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच के दौरान बीमारी का पता चलने पर श्रमिकों के उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। योजना का उद्देश्य श्रमिकों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और गंभीर बीमारियों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ना है।
इस अवसर पर उप श्रमायुक्त विपिन कुमार और वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ दुर्गा चमोली भी मौजूद रहीं।
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