मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर तक प्रस्तावित परियोजना से हजारों परिवारों पर विस्थापन का खतरा, मकानों पर लाल निशान लगाए जाने से क्षेत्रवासियों में आक्रोश
देहरादून, 14 अक्टूबर। मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर तक प्रस्तावित आशारोड़ी एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। बुधवार को आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति के बैनर तले प्रभावित क्षेत्रवासियों ने विधानसभा के सामने धरना देकर परियोजना रद्द करने की मांग उठाई। समिति का कहना है कि प्रस्तावित निर्माण से हजारों परिवारों के मकान और जमीन प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, संबंधित भवनों पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से लाल निशान लगाए जाने के बाद लोगों में चिंता और आक्रोश है।
घनी आबादी की ओर रूट मोड़ने पर उठाए सवाल
संघर्ष समिति की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, भारत सरकार की 7 अगस्त 2026 की गजट अधिसूचना संख्या-4205 के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-07 के किमी 0 से किमी 12.7 तक मोहकमपुर से आशारोड़ी के बीच कुछ हिस्सों में एलिवेटेड रोड निर्माण और शेष हिस्सों में हाईवे की चौड़ाई बढ़ाने की योजना स्वीकृत की गई है।
समिति के मुताबिक, प्रस्तावित मार्ग मोहकमपुर से आईआईटी के पीछे, मोहकमपुर रेलवे फाटक, रूपनगर, जोगीवाला फाटक, बद्रीपुर, पूजावाला, फ्रेंड्स एन्क्लेव कॉलोनी और डिफेंस कॉलोनी होते हुए रिस्पना नदी के बाद रेलवे कॉलोनी सहित अन्य बस्तियों से गुजरकर सोलिटियर होटल के पास अजबपुर फ्लाईओवर से जुड़ेगा।
पहले मुख्य सड़क के ऊपर प्रस्तावित था निर्माण
समिति ने आरोप लगाया कि पहले एलिवेटेड रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग-07 की मुख्य सड़क के ऊपर बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में रूट में बदलाव कर इसे घनी आबादी की ओर मोड़ दिया गया। समिति ने इस बदलाव के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति की संपत्ति को बचाने की आशंका जताई है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
समिति का कहना है कि वर्ष 2004-05 में भी इसी क्षेत्र के मकानों पर लाल निशान लगाए गए थे, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बाद उस समय परियोजना वापस लेनी पड़ी थी।
नोटिस नहीं मिलने का आरोप, घरों के भविष्य को लेकर चिंतित लोग
प्रभावित क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्हें परियोजना की जानकारी लगभग एक सप्ताह पहले मकानों पर लाल निशान लगाए जाने के दौरान मिली। उनका आरोप है कि इससे पहले समाचार पत्रों, सार्वजनिक सूचना या किसी अन्य माध्यम से उन्हें जानकारी नहीं दी गई।
प्रभावितों के अनुसार, प्रस्तावित निर्माण के कारण कुछ मकान एलिवेटेड रोड के ठीक नीचे आ सकते हैं। इससे उनकी सुरक्षा, निजता और सामान्य जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका है। समिति ने संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का हवाला देते हुए प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा की मांग की है।
क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट किया कि वे अपने घर और जमीन खोने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने परियोजना की समीक्षा कर इसे रद्द करने की मांग उठाई है।
धरने में ये लोग रहे मौजूद
धरना स्थल पर सुशील कुमार, टीएस नेगी, धीरज सिंह रावत, पीके भटनागर, मुकेश कुमार शर्मा, पं. राकेश पुरोहित, संतराम जायसवाल, एसपी नैथानी, ऊषा पडवाल, प्रशांत कुमार, महेंद्र, सुरेश बहुगुणा, त्रिभुवन सिंह, पूनम कुकरेती, राजेंद्र प्रसाद, अर्जुन सिंह और बलराम प्रजापति सहित अन्य लोग मौजूद रहे।





