FAIVM की पहल का असर, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात के बाद लगातार की गई पैरवी
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में व्यापारियों को राहत देने की दिशा में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM) की पहल सामने आई है। UPI भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क को 15 अक्टूबर से लागू करने के बजाय दिवाली तक टालने का निर्णय लिया गया है। प्रस्ताव के तहत ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर व्यापारियों से शुल्क वसूलने की संभावना जताई गई थी।
FAIVM के कोषाध्यक्ष सीए राजेश्वर पैन्यूली ने बताया कि संगठन ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव और संयुक्त सचिव से व्यक्तिगत मुलाकात की थी। इस दौरान व्यापारियों की समस्याओं और प्रस्तावित शुल्क से उन पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक बोझ के संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया गया। संगठन की ओर से लगातार पैरवी किए जाने के बाद शुल्क लागू करने के प्रस्ताव को दिवाली तक स्थगित करने का निर्णय व्यापारियों के लिए राहतकारी माना जा रहा है।
त्योहारी सीजन में बढ़ सकती थी व्यापारियों की लागत
सीए राजेश्वर पैन्यूली ने कहा कि दिवाली के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है और डिजिटल भुगतान का व्यापक इस्तेमाल होता है। ऐसे समय में UPI लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से छोटे दुकानदारों और खुदरा व्यापारियों की लागत बढ़ने की आशंका थी। इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन ने इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार की आवश्यकता को सरकार के समक्ष उठाया।
उन्होंने कहा कि FAIVM व्यापारियों के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार सरकार के समक्ष रखता रहा है। UPI शुल्क के प्रस्ताव को दिवाली तक स्थगित करना सकारात्मक कदम है। संगठन ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि अंतिम फैसला लेते समय छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और खुदरा कारोबारियों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।





