नगर निगम की प्रस्तावित व्यवस्था में विज्ञापन के अधिकार भी शामिल; नामांकन, कंपनी की विशेषज्ञता और वित्त विभाग की सहमति को लेकर उठे प्रश्न
देहरादून। शहर में सार्वजनिक पेयजल सुविधा के लिए स्थापित 24 वॉटर एटीएम के संचालन, रखरखाव और विज्ञापन अधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम देहरादून की ओर से इन वॉटर एटीएम का संचालन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ITI लिमिटेड को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत सौंपने की तैयारी की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इसके लिए खुली निविदा के बजाय नामांकन प्रक्रिया अपनाने का प्रस्ताव है। यदि ऐसा है, तो इस व्यवस्था के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया, उसकी नियमसम्मतता और संभावित राजस्व को लेकर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी होगा।
पहले से स्थापित हैं 24 वॉटर एटीएम
शहर में विभिन्न स्थानों पर 24 वॉटर एटीएम स्थापित किए गए हैं। इनमें से कई के बंद या खराब स्थिति में होने की बात सामने आई है। ऐसे में इनका संचालन दोबारा सुचारु करना और आम लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नगर निगम के लिए महत्वपूर्ण है।
जानकारी के अनुसार, ITI लिमिटेड ने इन वॉटर एटीएम को PPP मॉडल पर संचालित करने का प्रस्ताव दिया है। नगर निगम की ओर से इस परियोजना के लिए 20 शर्तें निर्धारित किए जाने की भी जानकारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब परियोजना की शर्तें तैयार की जा चुकी हैं, तो इन्हीं शर्तों के आधार पर खुली निविदा आमंत्रित कर अन्य इच्छुक कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है।
हालांकि, इस संबंध में नगर निगम का आधिकारिक पक्ष और प्रस्ताव से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही निर्णय की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नामांकन से चयन पर सवाल
सार्वजनिक सुविधाओं के संचालन के साथ विज्ञापन अधिकार भी जुड़े हों, तो संबंधित निकाय के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और संभावित राजस्व का आकलन महत्वपूर्ण हो जाता है। वॉटर एटीएम के मामले में भी यही प्रश्न उठ रहे हैं।
यदि ITI लिमिटेड को नामांकन के आधार पर जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया जा रहा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसके लिए किस नियम का सहारा लिया गया है। क्या नगर निगम बोर्ड या शासन से अनुमति ली गई है? क्या अन्य कंपनियों की रुचि जानने के लिए कोई सार्वजनिक सूचना जारी की गई? क्या इस निर्णय के पीछे कोई तकनीकी या प्रशासनिक कारण दर्ज किया गया है?
इन सवालों के जवाब परियोजना की प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
वॉटर एटीएम संचालन में ITI का अनुभव कितना?
ITI लिमिटेड एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जिसका प्रमुख कार्यक्षेत्र दूरसंचार और संबंधित प्रौद्योगिकी है। ऐसे में वॉटर एटीएम के संचालन, जल शुद्धिकरण प्रणाली, RO प्लांट के रखरखाव और विज्ञापन प्रबंधन में कंपनी के अनुभव को लेकर भी जानकारी अपेक्षित है।
नगर निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या ITI ने देश में पहले भी ऐसी परियोजनाओं का संचालन किया है। यदि हां, तो किन शहरों में और किस स्तर पर? क्या कंपनी के पूर्व कार्यों का तकनीकी मूल्यांकन किया गया है?
इसके अतिरिक्त, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि परियोजना का संचालन ITI स्वयं करेगी या किसी निजी एजेंसी की सेवाएं ली जाएंगी। यदि किसी अन्य कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी जानी है, तो उसके चयन की प्रक्रिया क्या होगी?
क्या वॉटर एटीएम परियोजना के लिए IT आधारित व्यवस्था जरूरी है?
वॉटर एटीएम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके संचालन में जल शुद्धिकरण मशीन, फिल्टर, डिस्पेंसर, बिजली-पानी की व्यवस्था, नियमित सफाई और तकनीकी रखरखाव जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। डिजिटल भुगतान और स्वचालित वितरण जैसी तकनीकी सुविधाएं भी इसका हिस्सा हो सकती हैं।
ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रस्तावित परियोजना में ITI की तकनीकी विशेषज्ञता की क्या भूमिका है और किन विशेष तकनीकी सुविधाओं के कारण कंपनी को प्राथमिकता दी जा रही है। यदि परियोजना में महत्वपूर्ण डिजिटल या तकनीकी घटक शामिल हैं, तो उनका विवरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
विज्ञापन अधिकारों और संभावित राजस्व का हिसाब क्या है?
इस प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण पहलू वॉटर एटीएम पर विज्ञापन के अधिकार भी हैं। यदि संचालन के साथ विज्ञापन से आय अर्जित करने का अधिकार किसी कंपनी को दिया जाता है, तो नगर निगम को मिलने वाले राजस्व और संबंधित कंपनी को मिलने वाले आर्थिक लाभ का स्पष्ट आकलन होना चाहिए।
प्रमुख सवाल यह है कि प्रस्तावित व्यवस्था में नगर निगम को कितनी आय प्राप्त होगी? क्या खुले टेंडर के माध्यम से अधिक राजस्व मिलने की संभावना का मूल्यांकन किया गया है? पानी की दरें कौन तय करेगा और उपभोक्ताओं को किस कीमत पर पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा?
इन बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी मिलने से यह आकलन किया जा सकेगा कि प्रस्ताव आम जनता और नगर निगम के हित में कितना लाभकारी है।
उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली के प्रावधानों पर भी चर्चा जरूरी
मीडिया ब्रीफ में उद्धृत उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 के नियम 2.1.2 और 4.4.3 के संदर्भ में भी सवाल उठाए गए हैं। ब्रीफ के अनुसार, नियम 2.1.2 में निविदा के माध्यम से अधिप्राप्ति की व्यवस्था तथा नियम 4.4.3 में नामांकन से सामान्यतः बचने की बात कही गई है।
यदि नगर निगम इस परियोजना के लिए नामांकन प्रक्रिया अपना रहा है, तो उसे यह स्पष्ट करना होगा कि निर्णय किस प्रावधान के तहत लिया जा रहा है और क्या संबंधित नियमों में निर्धारित अपवाद इस मामले में लागू होते हैं।
ब्रीफ में सरकारी उपक्रमों को उनकी विशेषज्ञता के कार्य नामांकन के आधार पर देने और ₹50 लाख से अधिक के कार्यों के लिए वित्त विभाग की सहमति से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख है। ऐसे में परियोजना की अनुमानित लागत, ITI की विशेषज्ञता से संबंधित आकलन और वित्त विभाग की सहमति की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। इन प्रावधानों की लागू होने की स्थिति का मूल नियमावली और परियोजना के दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन भी जरूरी है।
सार्वजनिक संपत्ति के आवंटन में पारदर्शिता के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के Akhil Bhartiya Upbhokta Congress बनाम मध्य प्रदेश राज्य (2011) और Ramana Dayaram Shetty बनाम International Airport Authority of India (1979) जैसे फैसले भी महत्वपूर्ण हैं। इन निर्णयों में सार्वजनिक संसाधनों के आवंटन में निष्पक्षता और गैर-मनमानेपन के सिद्धांतों पर जोर दिया गया है।
नगर निगम से इन सवालों के जवाब अपेक्षित
- 24 वॉटर एटीएम का संचालन ITI लिमिटेड को देने के लिए खुली निविदा के बजाय नामांकन प्रक्रिया अपनाने का आधार क्या है?
- क्या इस प्रस्ताव को नगर निगम बोर्ड, शासन या किसी सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी मिली है?
- परियोजना में ITI की तकनीकी विशेषज्ञता और पूर्व अनुभव का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया?
- क्या परियोजना के लिए वित्त विभाग की सहमति आवश्यक है और यदि हां, तो क्या यह प्राप्त की गई है?
- वॉटर एटीएम के संचालन और विज्ञापन अधिकारों से नगर निगम को कितनी आय होने का अनुमान है?
- क्या खुली निविदा के माध्यम से संभावित राजस्व का तुलनात्मक आकलन किया गया है?
- पानी की दरें, रखरखाव की जिम्मेदारी और सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था क्या होगी?
- क्या ITI स्वयं परियोजना संचालित करेगी या किसी निजी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपेगी?
वॉटर एटीएम शहर की एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुविधा हैं। इसलिए इनके संचालन की व्यवस्था तय करते समय नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और सार्वजनिक राजस्व के हितों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। नगर निगम की ओर से प्रस्ताव, संबंधित अनुमतियों और चयन प्रक्रिया के दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने से इस मामले में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।




