विज्ञान संचार को जन-जन तक पहुंचाने पर मंथन, 40 से अधिक पत्रकारों ने साझा किए सुझाव
देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से विज्ञान धाम, देहरादून में ‘एसटीआई नीति 2026 के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अवसरों की खोज में विज्ञान संचार और मीडिया की भूमिका’ विषय पर विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया। इसमें विज्ञान, मीडिया और विज्ञान संचार से जुड़े विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और नीतिगत प्राथमिकताओं को आम जनता तक सरल एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया।
सत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, तथ्यपरक विज्ञान पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने तथा डिजिटल मीडिया, सामुदायिक रेडियो और मल्टीमीडिया माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों, मीडिया संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और नवाचारकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
विज्ञान वाणी से घर-घर तक पहुंचेगी विज्ञान शिक्षा
यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि विज्ञान वाणी आमजन का रेडियो चैनल है, जिसके माध्यम से घर-घर तक विज्ञान शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
यूकॉस्ट के जनसंपर्क प्रबंधक एवं विज्ञान संचार प्रभारी अमित पोखरियाल ने कहा कि यह सत्र विज्ञान और पत्रकारिता को एक मंच प्रदान करता है। इसका उद्देश्य सरल एवं सहज भाषा में सही वैज्ञानिक जानकारी आमजन तक पहुंचाना है।
फोटोग्राफी और पत्रकारिता को बताया विज्ञान संचार का प्रभावी माध्यम
साइंस सिटी के सलाहकार एवं राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (एनसीएसएम) के पूर्व महानिदेशक जीएस रौतेला ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास और जनभागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने फोटोग्राफी को विज्ञान संचार का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि इसके जरिए जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं और खोजों को सरल एवं रोचक रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
सेमका, नई दिल्ली की मोनिका शर्मा ने ज्ञान संचार विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं, द पायनियर के पारितोष किमोठी ने वैज्ञानिक खोजों और उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाने में पत्रकारों एवं जनसंपर्क पेशेवरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विज्ञान को समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए सरल, प्रासंगिक और बोधगम्य बनाने के साथ सामुदायिक रेडियो को सशक्त करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
अनिल चंदोला ने ग्रामीण विकास और स्थानीय समुदायों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने में सामुदायिक रेडियो के महत्व को रेखांकित किया।
डिजिटल मीडिया और एआई से बढ़ेगी विज्ञान संचार की पहुंच
देहरादून की जिला सूचना अधिकारी प्रियंका जोशी ने डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने प्रामाणिक, रोचक और वैज्ञानिक रूप से सत्यापित सामग्री के प्रसार में डिजिटल प्लेटफॉर्म की संभावनाओं को सामने रखा।
डॉ. नवनीत गैरोला ने दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने, सामुदायिक रेडियो केंद्रों के बीच नेटवर्किंग मजबूत करने और आपदा पूर्व तैयारी, राहत एवं प्रबंधन में सामुदायिक रेडियो के प्रभावी उपयोग पर बल दिया।
स्पेक्स (SPECS) के डॉ. बीएम शर्मा ने परिवहन क्षेत्र में जैव-अपघटनीय विकल्पों को बढ़ावा देने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने और मानव शरीर के माध्यम से विज्ञान को समझने के महत्व पर चर्चा की।
सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल स्टोरीटेलिंग, क्षेत्रीय भाषाओं और मल्टीमीडिया के माध्यम से विज्ञान संचार की पहुंच बढ़ाने पर भी विचार किया गया। विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक भ्रामक सूचनाओं की पहचान एवं रोकथाम और जिम्मेदार विज्ञान पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई।
आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में विज्ञान संचार पर जोर
चर्चा के दौरान उत्तराखंड की स्थानीय परिस्थितियों और चुनौतियों के अनुरूप विज्ञान संचार को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, जल प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे विषयों पर वैज्ञानिक जानकारी को जनसुलभ बनाने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों, मीडिया संगठनों, सामुदायिक रेडियो नेटवर्क और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई गई।
विचार-मंथन सत्र में प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया संस्थानों के 40 से अधिक पत्रकारों ने भाग लिया और विज्ञान संचार एवं मीडिया आउटरीच को मजबूत बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, दून विश्वविद्यालय, जेबीआईटी और देवभूमि विश्वविद्यालय के जनसंचार विभागों के विद्यार्थियों ने भी प्रतिभाग किया। इससे विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के साथ संवाद करने और विज्ञान पत्रकारिता के उभरते आयामों को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट की वैज्ञानिक अधिकारी कंचन उनियाल ने किया। इस अवसर पर यूकॉस्ट एवं विज्ञान सेतु की टीम से जागृति उनियाल, वैज्ञानिक अधिकारी, कैलाश चंद्र, सलाहकार सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
सत्र में प्राप्त सुझावों को भविष्य में विज्ञान संचार कार्यक्रमों, क्षमता विकास पहलों और जनजागरूकता गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करने में उपयोगी बताया गया। यूकॉस्ट की इस पहल को विज्ञान, मीडिया और समाज के बीच समन्वय बढ़ाने तथा एसटीआई नीति 2026 के उद्देश्यों के अनुरूप वैज्ञानिक जागरूकता और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
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