देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार ने सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था के बाद प्रदेश में 35 हजार से अधिक युवाओं को बिना किसी पर्ची-खर्ची के सरकारी नौकरी मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और नकल से जुड़े मामलों ने युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया। इसके विपरीत उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए हैं।
उत्तराखंड सरकार के अनुसार, ‘उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023’ के तहत भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोषी पाए जाने वालों को 10 वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को ऐसी भर्ती व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिसमें उनकी मेहनत और योग्यता के आधार पर चयन हो तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता के लिए जगह न रहे।





