
देहरादून। गढ़ी कैंट स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित विरासत महोत्सव-2026 में रविवार को उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिला। दिनभर लोगों ने महोत्सव में खरीदारी के साथ विभिन्न सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। सुपर बाइक रैली, पर्यावरण पर आधारित लोकनाट्य, कवि सम्मेलन और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां रविवार के प्रमुख आकर्षण रहे।
24 पुरानी मोटरसाइकिलों के साथ निकली सुपर बाइक रैली
रविवार सुबह महोत्सव की शुरुआत सुपर बाइक रैली से हुई। 24 पुरानी मॉडल की मोटरसाइकिलों के साथ आयोजित रैली को रीच संस्था की आयोजन समिति की संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी ने हिमालयन कल्चरल सेंटर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली गढ़ी कैंट, दिलाराम और मसूरी डायवर्जन सहित निर्धारित मार्गों से होकर गुजरी। इस दौरान प्रतिभागियों ने ब्रू कासा कैफे में पिट स्टॉप भी लिया। रैली में बीएमडब्ल्यू एस 1000 आरआर और रॉयल एनफील्ड कॉन्टिनेंटल जीटी 650 जैसी मोटरसाइकिलें आकर्षण का केंद्र रहीं। रैली का समापन सुरक्षित रूप से विरासत परिसर में हुआ।
लोकनाट्य ‘चक्रव्यूह’ के जरिए दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
महोत्सव में उत्तराखंड की लोक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित लोकनाट्य ‘चक्रव्यूह’ का मंचन किया गया। डॉ. पुरोहित और सुशील पुरोहित के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। कलाकारों ने पांडवों, कौरवों और महाभारत के अन्य प्रमुख पात्रों की भूमिकाओं में प्रभावशाली अभिनय किया।
प्रस्तुति में हारमोनियम, हुड़का, थाली, ढोल, दमाऊ, भूमकारे और बांसुरी की संगत ने लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। डॉ. शैलेन्द्र मैठाणी, धीरज राणा, दिव्यांशु, अमन, प्रिया राणा, रिया और आशीष ने गायन के माध्यम से प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया।
कवि सम्मेलन में गीत, गजल और हास्य की बही रसधारा
विरासत महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर रविवार दोपहर आयोजित कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर किया। दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक चले इस आयोजन में हास्य, शृंगार, ओज, गीत और गजलों की प्रस्तुतियां हुईं।
दिल्ली की कवयित्री डॉ. रजनी चौहान के संयोजन में आयोजित कवि सम्मेलन में मेरठ के राष्ट्रीय कवि अरुण शर्मा, शामली के अंतरराष्ट्रीय शायर प्रदीप मायूस, वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार रमेश चंद्र, बड़ौत के डॉ. निखिल चौहान ‘मन’, गजलकार गुरुदत्त और दिव्यांश मिश्रा ने काव्य पाठ किया। डॉ. रजनी चौहान ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया। कवियों की रचनाओं में प्रेम, संवेदना, हास्य और सामाजिक सरोकारों की झलक देखने को मिली।
रागिनी शंकर के वायलिन वादन ने बांधा समां
रविवार की शाम प्रसिद्ध वायलिन वादक रागिनी शंकर की शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति के नाम रही। उनके साथ तबले पर प्रख्यात संगीतकार पंडित अभिषेक मिश्रा ने संगत की। कार्यक्रम की शुरुआत राग रागेश्री से हुई, जिसमें वायलिन के विभिन्न आलाप और गतों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। वहीं समापन राग भैरवी की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ हुआ।
सात पीढ़ियों से संगीत की समृद्ध परंपरा वाले परिवार से जुड़ी रागिनी शंकर संगीतकारों की आठवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने चार वर्ष की आयु में अपनी दादी पद्म विभूषण डॉ. एन. राजम और माता डॉ. संगीता शंकर के मार्गदर्शन में वायलिन का प्रशिक्षण शुरू किया था। भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी रागिनी शंकर ने देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुतियां दी हैं। उन्हें जश्न-ए-यंगिस्तान पुरस्कार, आदित्य बिरला कला किरण पुरस्कार और जया स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
विरासत महोत्सव के रविवार के आयोजन में लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, साहित्य और शास्त्रीय संगीत का सुंदर संगम देखने को मिला। दिनभर बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने महोत्सव की विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर आयोजन का आनंद लिया।
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