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सिर पर बोझ उठाओ तो
कंधे दुखने लगते है।
सत्य की राह मे चलते चलते
झूठे ठगने लगते है।
अखियाँ पानी मे डूब गई
जब डूबे तब जिंदा थे।
झूठे खुश हो रहे न्याय पर
सच्चे लोग शर्मिंदा थे।
नेता देश के भ्रष्ट हो गये
संविधान बना खिलौना है।
सफेद पोश व्यक्ति के पीछे
दोगला चरित्र घिनौना हैl
दिन मे सोते रात मे जगते
उल्टी चाले चलते है।
महकी हुई सुन्दर बगिया मे
विषैले सर्प भी पलते हैl
“अनीता चमोली”अनू”
देहरादून (उत्तराखंड)
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