देहरादून। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस राजेश टंडन को न्यायपालिका में उनके उल्लेखनीय योगदान, संविधान के प्रति अटूट निष्ठा, न्यायिक उत्कृष्टता तथा जनसेवा के लिए प्रतिष्ठित ‘Honour of Ashoka Award 2026’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें न्याय के प्रति उनकी निष्पक्ष प्रतिबद्धता, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और विधि के शासन को सुदृढ़ करने में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह में जारी प्रशस्ति-पत्र के अनुसार, जस्टिस राजेश टंडन ने अपने न्यायिक जीवन में सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और विवेक के साथ संविधान की भावना को अक्षुण्ण बनाए रखने का कार्य किया। उनके नेतृत्व, न्यायिक कौशल और उत्कृष्ट निर्णयों ने न केवल न्यायपालिका की गरिमा को बढ़ाया, बल्कि देश की विधिक व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान की।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस टंडन ने पर्यावरण संरक्षण, महिला अधिकारों, मानवाधिकारों, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनहित से जुड़े अनेक मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय दिए। उनके कई फैसलों को न्यायिक क्षेत्र में मिसाल के रूप में देखा जाता है। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे विधि शिक्षा, लोक अदालतों और संवैधानिक जागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज में कानून के प्रति विश्वास और जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।
‘Honour of Ashoka Award’ सम्राट अशोक के न्याय, नैतिक शासन और जनकल्याण के आदर्शों से प्रेरित सम्मान है। सम्मान आयोजकों के अनुसार यह पुरस्कार उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में सत्य, न्याय, नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
जस्टिस राजेश टंडन को मिला यह सम्मान न केवल उनके उत्कृष्ट न्यायिक जीवन का सम्मान है, बल्कि उन मूल्यों का भी सम्मान है जिन पर भारतीय न्यायपालिका की नींव टिकी है। उनका व्यक्तित्व और कार्यशैली नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और विधि के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत मानी जाती है। न्याय, निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श के रूप में देखा जाएगा।



