देहरादून, 22 सितंबर 2026। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यू-कॉस्ट) की POSH समिति ने डॉल्फिन पी.जी. इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज, देहरादून के सहयोग से कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) को लेकर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को POSH अधिनियम, 2013, सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्यस्थल तथा इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. बीना जोशी भट्ट, डॉल्फिन इंस्टीट्यूट के स्वागत संबोधन से हुआ। डॉ. मंजू सुन्द्रियाल, वैज्ञानिक, यू-कॉस्ट ने कार्यशाला के उद्देश्य एवं कार्यक्रम की जानकारी दी। POSH विशेषज्ञ डॉ. रीमा पंत ने फिजियोथेरेपी विद्यार्थियों को उनके अध्ययन एवं भावी पेशे से जोड़ते हुए POSH अधिनियम और कार्यस्थल पर सुरक्षित एवं सम्मानजनक व्यवहार के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में थेरेपिस्ट और मरीज के बीच शारीरिक संपर्क सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए सुरक्षा, गरिमा और व्यक्तिगत सीमाओं की स्पष्ट समझ बेहद आवश्यक है। उन्होंने संस्थान एवं क्लिनिक स्तर पर POSH नीति के अनुपालन तथा महिलाओं और पुरुषों के लिए शिकायत दर्ज कराने की कानूनी प्रक्रिया की जानकारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
इसके बाद POSH विशेषज्ञ अधिवक्ता कनिका ने विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक सत्र का संचालन किया। इस दौरान कानूनी प्रावधानों, शिकायत प्रक्रिया, अधिकारों एवं जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। विभिन्न व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को POSH से जुड़े प्रावधानों को समझाया गया।
कार्यशाला में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से संवाद करते हुए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम, शिकायत निवारण एवं कानूनी अधिकारों से जुड़े प्रश्न पूछे। कार्यशाला में डॉल्फिन इंस्टीट्यूट के करीब 250 विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने सक्रिय प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के अंत में सुश्री जागृति उनियाल, वैज्ञानिक अधिकारी, यू-कॉस्ट द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस अवसर पर यू-कॉस्ट की POSH समिति एवं डॉल्फिन इंस्टीट्यूट के संबंधित अधिकारी, विशेषज्ञ एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।




