देहरादून, 5 नवंबर। उत्तराखंड के सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए तदर्थ बोनस मिलने का रास्ता साफ हो गया है। वित्त विभाग की ओर से जारी शासनादेश के बाद अब संबंधित प्रशासनिक विभाग अपने अधीनस्थ निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों की वित्तीय स्थिति का आकलन कर पात्र कर्मचारियों को वर्ष 2025-26 का बोनस देने का निर्णय स्वयं ले सकेंगे। इसके लिए वित्त विभाग से अलग से सहमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

औद्योगिक विकास अनुभाग-2 के सचिव विनय शंकर पांडेय ने 5 नवंबर को इस संबंध में सभी संबंधित प्रशासनिक विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
वित्तीय स्थिति के आधार पर होगा निर्णय
वित्त विभाग के 2 नवंबर को जारी शासनादेश के क्रम में सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को सार्वजनिक उपक्रमों एवं निगमों में बोनस भुगतान के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। जिन संस्थानों में बोनस की देयता बनती है और जो अपने संसाधनों से इसका वित्तीय भार उठाने में सक्षम हैं, वे निर्धारित शर्तों के अनुसार पात्र कर्मचारियों को बोनस दे सकेंगे।
अधिकतम सात हजार रुपये की गणना सीमा
शासनादेश के अनुसार समूह ‘ग’ एवं ‘घ’ के कर्मचारियों तथा समूह ‘ख’ के अराजपत्रित कर्मचारियों को तदर्थ बोनस का लाभ मिलेगा। इसके लिए अधिकतम 4800 रुपये ग्रेड वेतन यानी पुनरीक्षित वेतनमान में लेवल-8 तक की सीमा निर्धारित की गई है। बोनस की गणना अधिकतम 30 दिन की परिलब्धियों के आधार पर सात हजार रुपये की सीमा तक की जाएगी।
छह माह की सेवा अनिवार्य
बोनस के लिए कर्मचारी का 31 मार्च 2026 को सेवा में होना और इस तिथि तक न्यूनतम छह माह की निरंतर एवं संतोषजनक सेवा पूरी करना अनिवार्य है। एक वर्ष से कम लेकिन छह माह या उससे अधिक सेवा करने वाले कर्मचारियों को आनुपातिक आधार पर बोनस मिलेगा।
दैनिक वेतनभोगी और कैजुअल कर्मचारियों के लिए भी प्रावधान किया गया है। निर्धारित तीन वर्षों में छह कार्यदिवसीय कार्यालयों में प्रत्येक वर्ष 240 दिन और पांच कार्यदिवसीय कार्यालयों में 206 दिन काम करने वाले कर्मचारी भी शर्तों के अधीन पात्र होंगे। इनके लिए 1184 रुपये का तदर्थ बोनस निर्धारित किया गया है।
अनुशासनात्मक मामलों में लागू होंगी शर्तें
जिन कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमा लंबित है, उनका बोनस भुगतान मामले का परिणाम आने तक स्थगित रहेगा। वहीं वर्ष 2025-26 में दंडित कर्मचारियों को बोनस देय नहीं होगा। अन्य अवकाश, निलंबन और पात्रता से संबंधित शर्तें भी शासनादेश के अनुसार लागू होंगी।
स्थानीय निकायों एवं विकास प्राधिकरणों को भी अपनी वित्तीय स्थिति लाभ में होने पर कर्मचारियों को बोनस देने की अनुमति होगी। हालांकि इसका पूरा वित्तीय भार संबंधित संस्थान को अपने संसाधनों से उठाना होगा। सरकार की ओर से इसके लिए अतिरिक्त अनुदान नहीं दिया जाएगा।
नकद भुगतान का प्रावधान
अनुमन्य बोनस का भुगतान कर्मचारियों को नकद किया जाएगा। इसकी धनराशि संबंधित कर्मचारियों के वेतन व्यय वाले लेखाशीर्षक में दर्ज कर ‘वेतन’ मद के अंतर्गत लेखांकित होगी।
सूर्य प्रकाश रणाकोटी ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रकाश रणाकोटी ने निगम कर्मचारियों को बोनस देने की दिशा में सरकार की पहल का स्वागत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय से निगम कर्मचारी बोनस की उम्मीद लगाए बैठे थे।
उन्होंने सचिव विनय शंकर पांडेय का भी आभार जताया। रणाकोटी ने उम्मीद जताई कि सभी निगम एवं सार्वजनिक उपक्रम अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन कर पात्र कर्मचारियों को जल्द बोनस का लाभ देंगे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने में सहायक होगा।



