21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का देहरादून में शुभारंभ, 13 तकनीकी सत्रों में 260 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत

विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के जरिए हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान पर मंथन, 60 से अधिक संस्थानों और स्टार्टअप्स ने लगाई प्रदर्शनी
देहरादून, 25 अक्टूबर। उत्तराखंड में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रविवार को विज्ञान धाम, देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) का शुभारंभ हुआ। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विकास, नवाचार और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों सहित लगभग एक हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन के पहले दिन 13 तकनीकी प्रभागों में 260 से अधिक शोध पत्र मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति, विज्ञान संचार, युवा शोधकर्ताओं की भूमिका और वैज्ञानिक उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
विज्ञान और तकनीक से समस्याओं के समाधान पर जोर
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उन्हें समाज की आवश्यकताओं और स्थानीय समस्याओं के समाधान से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान कर उनके वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान तलाशने की दिशा में काम करना चाहिए। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग राज्य के विकास को नई दिशा दे सकता है। इसके लिए अनुसंधान, नवाचार और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच समन्वय आवश्यक है।
सम्मेलन के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में पर्यावरण संरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में वैज्ञानिक अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति-2026 के उद्देश्यों की जानकारी दी
यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने सम्मेलन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति-2026 के प्रमुख उद्देश्यों और इसके अंतर्गत अनुसंधान तथा नवाचार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतर समन्वय स्थापित करना, ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाना और वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज की जरूरतों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर उन्होंने ‘विज्ञान सेतु’ पहल के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विज्ञान और समाज के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने, वैज्ञानिक ज्ञान एवं उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने में ऐसी पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिक उपलब्धियों को केवल शोध संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय उनके व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देना और आमजन को विज्ञान एवं तकनीक से होने वाले लाभों से जोड़ना भी है।
13 तकनीकी प्रभागों में प्रस्तुत किए गए 260 से अधिक शोध पत्र
सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न विषयों से संबंधित 260 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन्हें 13 तकनीकी प्रभागों के अंतर्गत मौखिक प्रस्तुतियों और पोस्टर सत्रों के माध्यम से सामने रखा गया। इन सत्रों में शोधकर्ताओं को अपने निष्कर्ष साझा करने, विशेषज्ञों से संवाद करने और नए शोध विचारों पर चर्चा करने का अवसर मिला।
तकनीकी सत्रों में कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान, रासायनिक विज्ञान और भू-विज्ञान जैसे विषय शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त इंजीनियरिंग विज्ञान, पदार्थ विज्ञान एवं नैनो प्रौद्योगिकी, गृह विज्ञान, स्वास्थ्य एवं पोषण, गणित एवं सांख्यिकी, कंप्यूटर विज्ञान एवं उभरती प्रौद्योगिकियों, चिकित्सा एवं औषध विज्ञान तथा भौतिक विज्ञान से जुड़े शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए।
ग्रामीण विज्ञान एवं विज्ञान और समाज, प्राणी विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन के साथ ‘वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नवाचारकर्ता’ (Innovator of the Year) श्रेणी को भी सम्मेलन में शामिल किया गया।
इन सत्रों के माध्यम से विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच संवाद को बढ़ावा देने, शोध निष्कर्षों के आदान-प्रदान और युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया।
‘विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ पर विचार-मंथन
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) नीति: विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ विषय पर विशेष विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया।
इस सत्र में राज्य के दीर्घकालिक विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका, अनुसंधान की भावी दिशा और वैज्ञानिक उपलब्धियों को विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
विचार-विमर्श में उभरती प्रौद्योगिकियों, अंतर्विषयक अनुसंधान और नवाचार आधारित विकास को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया गया। साथ ही, उत्तराखंड के हिमालयी भू-भाग की विशिष्ट परिस्थितियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की जरूरत को भी रेखांकित किया गया।
सम्मेलन में वैज्ञानिक अनुसंधान को राज्य की विकास योजनाओं और सामाजिक आवश्यकताओं से जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया, ताकि विज्ञान एवं तकनीक का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंच सके।
विज्ञान संचार में मीडिया की भूमिका पर विशेष सत्र
सम्मेलन में विज्ञान संचार तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति पर एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों और प्रख्यात पत्रकारों ने भाग लिया।
सत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और जनसंचार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, विज्ञान से जुड़े जटिल विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करने तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर चर्चा हुई।
इस दौरान वैज्ञानिक जानकारी को सहज, सरल और जनसुलभ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने और शोध एवं नवाचार को व्यापक पहचान दिलाने में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
सत्र में इस बात पर भी चर्चा हुई कि वैज्ञानिक संस्थानों और समाज के बीच संवाद मजबूत करने के लिए प्रभावी विज्ञान संचार आवश्यक है। मीडिया के माध्यम से वैज्ञानिक उपलब्धियों, नई तकनीकों और अनुसंधान आधारित समाधानों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जा सकती है।
द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का आयोजन
सम्मेलन के अंतर्गत द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें वैज्ञानिक गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से विज्ञान को अधिक रोचक, संवादात्मक और सहभागितापूर्ण बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
युवाओं की भागीदारी को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना गया। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और युवा प्रतिभाओं को विज्ञान से जुड़ने, अपनी जिज्ञासाओं को सामने रखने और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करने के अवसर प्रदान करते हैं।
‘लैब ऑन व्हील्स’ से विज्ञान को जनसामान्य तक पहुंचाने की पहल
सम्मेलन में ‘लैब ऑन व्हील्स’ (Lab on Wheels) अभिमुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक प्रयोगों, गतिविधियों और ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुंचाना तथा विद्यार्थियों और आमजन में वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करना है।
इस तरह की पहल के माध्यम से विज्ञान को केवल कक्षाओं और प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय लोगों के बीच ले जाने का प्रयास किया जाता है। इससे विद्यार्थियों को प्रयोग आधारित शिक्षा से जोड़ने और विज्ञान को व्यावहारिक रूप में समझने के अवसर मिल सकते हैं।
सम्मेलन में वैज्ञानिक गतिविधियों को अधिक सुलभ बनाने और विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने से जुड़े प्रयासों पर भी चर्चा की गई।
60 से अधिक वैज्ञानिक संस्थानों और स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी
सम्मेलन परिसर में 60 से अधिक वैज्ञानिक एवं शिक्षण संस्थानों तथा स्टार्टअप्स की ओर से प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों, उभरती प्रौद्योगिकियों और उद्यमशीलता से जुड़े प्रयासों को प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी ने संस्थानों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को अपने कार्यों एवं उपलब्धियों को प्रस्तुत करने का अवसर दिया। इसके साथ ही प्रतिभागियों को एक-दूसरे के कार्यों को समझने, विचारों का आदान-प्रदान करने और संभावित सहयोग के अवसर तलाशने के लिए साझा मंच मिला।
प्रदर्शनी में अनुसंधान आधारित समाधानों और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को सामने लाने पर विशेष जोर रहा। इससे वैज्ञानिक शोध को उपयोगी तकनीकों और नवाचारों में बदलने की संभावनाओं पर संवाद को बढ़ावा मिला।
इस अवसर पर सम्मेलन की सार-संक्षेप पुस्तिका (Abstract Book) का विमोचन भी किया गया। इसमें सम्मेलन से संबंधित शोध पत्रों के सार संकलित किए गए हैं।
उद्घाटन सत्र में कई प्रमुख विशेषज्ञ रहे मौजूद
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी), देहरादून की निदेशक डॉ. दर्शना जोशी, विज्ञानशाला के निदेशक केशव आशीष और विज्ञान भारती के संगठन मंत्री सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
सम्मेलन में वैज्ञानिक समुदाय, शिक्षण संस्थानों, शासन, उद्योग, मीडिया और नवाचार से जुड़े लोगों की सहभागिता ने विभिन्न क्षेत्रों के बीच संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान किया।
हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान में विज्ञान की भूमिका पर जोर
21वां उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।
उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से नए समाधान तलाशे जा सकते हैं। सम्मेलन में इन क्षेत्रों में काम कर रहे विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं को अपने अनुभव साझा करने का मंच मिला।
इसके साथ ही अनुसंधान, शिक्षा, शासन, उद्योग और समाज के बीच समन्वय को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान, युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन और नवाचार आधारित समाधानों को बढ़ावा देना है।
लगभग एक हजार प्रतिभागियों की सहभागिता वाला यह सम्मेलन 25 और 26 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है। इसके विभिन्न सत्रों और गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को राज्य के सतत और समावेशी विकास से जोड़ने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने पर मंथन किया जा रहा है।




