
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आवास विभाग के अधीन प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने लंबित मास्टर प्लान, विकास परियोजनाओं, अवैध निर्माण, पार्किंग, सौंदर्यीकरण और नागरिक सुविधाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट समय-सीमा के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर उनके पूरा होने की समय-सीमा तय की जाए। प्रत्येक कार्य के लिए संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी भी निर्धारित करने के निर्देश दिए गए।
15 अक्टूबर तक पूरा हो सौंदर्यीकरण
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में इसी माह से सौंदर्यीकरण के कार्य शुरू कर 15 अक्टूबर तक पूरे किए जाएं। इन कार्यों की गुणवत्ता और स्वरूप G20 समिट के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण की तर्ज पर आकर्षक रखने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि किसी कार्य के लिए बजट की आवश्यकता होने पर उसकी व्यवस्था की जाए, लेकिन बजट की कमी को काम में देरी का कारण नहीं बनने दिया जाएगा।
15 दिन में प्राधिकरण क्षेत्र की सड़कें होंगी दुरुस्त
मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों के अधीन आने वाली सड़कों की स्थिति पर भी नाराजगी जताते हुए सभी सड़कों का सर्वे कराने के निर्देश दिए। खराब सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करने और अगले 15 दिनों में प्राधिकरण क्षेत्र की सभी सड़कों को बेहतर स्थिति में लाने को कहा गया। साथ ही सड़क सुधार कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
अवैध निर्माण पर रियल टाइम निगरानी
अवैध निर्माण के मामलों में मुख्यमंत्री ने शुरुआती स्तर पर ही कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन के माध्यम से संदिग्ध निर्माण की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा।
हर विकास प्राधिकरण में Illegal Construction Monitoring Dashboard विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण तक की पूरी कार्रवाई की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
हर शहर में सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट
मुख्यमंत्री ने सभी शहरों में सिटी पार्क विकसित करने को अनिवार्य करने के निर्देश दिए। प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य टॉयलेट के साथ पिंक टॉयलेट की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। जरूरत के अनुसार शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी पिंक टॉयलेट विकसित किए जाएंगे।
अधिकारियों को अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए गए। सार्वजनिक सुविधाओं में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया।
पार्किंग समस्या के समाधान पर जोर
देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में बढ़ती पार्किंग समस्या को लेकर मुख्यमंत्री ने पर्याप्त पार्किंग सुविधा से वंचित नगर निकायों को चिन्हित करने के निर्देश दिए। MDDA और HRDA को संबंधित नगर निकायों के साथ समन्वय कर मल्टी-लेवल पार्किंग, सरफेस पार्किंग, पेरीफेरल पार्किंग और PPP मॉडल के माध्यम से पार्किंग विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति व्यवस्था होगी और प्रभावी
मुख्यमंत्री ने भवन मानचित्र स्वीकृति की ऑनलाइन व्यवस्था को सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों से एकीकृत करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट को भी नागरिकों के लिए अधिक सरल और उपयोगी बनाने तथा योजनाओं, नियमों, शुल्क और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। प्रस्तावित चैटबॉट की प्रगति की भी मुख्यमंत्री ने जानकारी ली।
PM आवास योजना की लाभार्थी सूची मांगी
प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में योजना का लाभ प्राप्त कर चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और BPL परिवारों की विस्तृत सूची तैयार करने के निर्देश दिए। यह सूची 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया।
2-3 क्षेत्रों में Land Pooling का पायलट प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री ने Land Pooling Scheme को लेकर भी अधिकारियों को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कम से कम 2 से 3 विकास क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में योजना लागू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। साथ ही किसानों और भूमि मालिकों को मिलने वाले लाभ का स्पष्ट और पारदर्शी मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकसित हों सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों में भी स्ट्रीट लाइट, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी नागरिक सुविधाओं का विकास किया जाए। इसके लिए स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास योजनाओं का लाभ जनता को समय पर मिलना चाहिए। प्रत्येक कार्य की समय-सीमा तय कर उसकी नियमित निगरानी की जाए और लापरवाही या अनावश्यक देरी मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाए।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार सहित प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।




