देहरादून, 3 नवंबर। द पॉली किड्स की तुनवला और मोहकमपुर शाखाओं के वार्षिक समारोह सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम, हाथीबड़कला में धूमधाम से आयोजित किए गए। समारोह में नन्हे विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोकनृत्यों, संगीत और विभिन्न विषयों पर आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। दोनों समारोहों में लगभग 600 अतिथियों एवं अभिभावकों ने शिरकत कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता, उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपराओं, राष्ट्रीय एकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने के साथ ही विद्यालय की रचनात्मक एवं समग्र शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित किया।
तुनवला शाखा ने ‘द रेनबो लैंड’ से बिखेरे भारत के रंग
तुनवला शाखा का वार्षिक समारोह ‘द रेनबो लैंड – भारत के रंगों का उत्सव’ थीम पर आधारित रहा। इस दौरान विद्यार्थियों ने देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और विविधताओं को मंच पर जीवंत किया।
कार्यक्रम में शिव तांडव, पंजाब के भांगड़े, गोवा कार्निवल, ‘मेरा देश, मेरी शान’, गुजरात के बाल-जलसा, रंगीलो राजस्थान और उत्तराखंड पर आधारित ‘रिदम्स ऑफ द गॉड्स’ जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके अलावा ‘सांवरी सूरत’, ‘भोली राधा’, ‘परंपरा एंड स्वरूप’, ‘मैनी स्टेट्स, वन स्पिरिट’ और ‘तरंग – द वेव’ जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को प्रदर्शित किया गया।
इन कार्यक्रमों में देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय गौरव और विविधता में एकता का संदेश देखने को मिला। विद्यार्थियों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया।
मोहकमपुर शाखा ने ‘पहाड़नामा’ से दिखाई देवभूमि की संस्कृति
मोहकमपुर शाखा का वार्षिक समारोह ‘पहाड़नामा – उत्तराखंड की गूंज’ थीम पर आयोजित किया गया। इसमें उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराओं, लोककथाओं, आध्यात्मिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता को विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत गीत से हुई। इसके बाद ‘छोटे रॉकर्स’, ‘नन्ही मुस्कान इन पहाड़’, ‘देवभूमि की फुलारिया’, ‘राम्माण फेस्टिवल’, ‘पहाड़ी ग्लैमर’, ‘आंचल कुमाऊं का’ और ‘फूल संक्रांति’ जैसी प्रस्तुतियों ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विविधता को सामने रखा।
‘मेरी धना – ठंडो रे ठंडो’, ‘जंगल की चीख – पेड़ की आत्मकथा’, ‘नन्हे भक्त और मां नंदा’, ‘आछरी जागर’ तथा ‘योद्धा – मार्शल आर्ट्स पावर’ जैसी प्रस्तुतियों ने लोकपरंपराओं, आध्यात्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और साहस का संदेश दिया। समारोह का समापन ‘अंतिम झलक – देवभूमि की गूंज’ के साथ हुआ।
सांस्कृतिक विरासत के साथ समग्र शिक्षा पर जोर
दोनों वार्षिक समारोहों ने बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक समझ और सामाजिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करने के प्रति द पॉली किड्स की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिला।
समारोहों में द पॉली किड्स के अध्यक्ष कैप्टन मुकुल महेंद्रू और संस्थापक निदेशक रंजना महेंद्रू की गरिमामयी उपस्थिति रही। निदेशक वंदना छेत्री, सिद्धार्थ चंदोला और आशीष कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अभिभावकों और अन्य उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर निदेशक नंदिता सिंह, ऋषभ डोभाल, कोमल तिवारी, तरुण ठाकुर, गीतिका चलगा, शालिनी नेगी, अकादमिक प्रमुख दिव्या जैन, कार्यक्रम प्रमुख दीप्ति सेठी, प्रधानाचार्या हिमांशी अरोड़ा, नेहा बिष्ट, नेहा सहगल, शिवानी माजरी, अक्षरा और संगीता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
द पॉली किड्स की ओर से आयोजित इन समारोहों ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियां, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक मूल्यों की समझ भी बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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