पीएमजीएसवाई के चतुर्थ चरण के द्वितीय चरण के प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए अधिकार प्राप्त समिति के समक्ष प्रस्तुत, केंद्र ने राज्य के लिए निर्धारित किया 420 करोड़ रुपये का बजट
देहरादून। उत्तराखंड के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क संपर्कता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चतुर्थ चरण के द्वितीय चरण के तहत प्रदेश में 3,172 किलोमीटर लंबाई की 528 सड़कों और 19 पुलों के निर्माण का रास्ता आगे बढ़ा है। राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित इन कार्यों को तकनीकी-आर्थिक परीक्षण की प्रक्रिया से आगे बढ़ाते हुए अंतिम मूल्यांकन एवं स्वीकृति के लिए अधिकार प्राप्त समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बेहतर होने के साथ ही दूरस्थ गांवों को मुख्य मार्गों और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर इस संबंध में जानकारी दी है। केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में उत्तराखंड में ग्रामीण सड़क संपर्कता को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क नेटवर्क विकसित करना विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे न केवल आवागमन सुगम होता है, बल्कि ग्रामीण आबादी को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचने में भी सहूलियत मिलती है।
30 सितंबर को हुई थी तकनीकी-आर्थिक समिति की बैठक
केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि उत्तराखंड सरकार की ओर से प्रस्तावित 528 सड़कों और 19 पुलों के निर्माण संबंधी प्रस्तावों पर 30 सितंबर 2026 को तकनीकी-आर्थिक समिति की बैठक आयोजित की गई थी। समिति की प्रक्रिया के बाद आवश्यक अनुमोदन प्राप्त होने पर इन प्रस्तावों को अंतिम मूल्यांकन एवं स्वीकृति के लिए अधिकार प्राप्त समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। इस प्रक्रिया के आगे बढ़ने से प्रदेश में ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार की उम्मीद मजबूत हुई है।
प्रस्तावित 3,172 किलोमीटर लंबाई की सड़कों के निर्माण से राज्य के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्कता का विस्तार होगा। वहीं, 19 पुलों का निर्माण ऐसे क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जहां नदी, नालों और अन्य प्राकृतिक अवरोधों के कारण ग्रामीणों को आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में सड़क और पुलों का निर्माण ग्रामीण विकास के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं की पहुंच के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 420 करोड़ रुपये का आवंटन
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तराखंड के लिए 333 किलोमीटर सड़क निर्माण का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 420 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने पत्र में अब तक हुई प्रगति का भी उल्लेख किया है। निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष प्रदेश में 35 किलोमीटर सड़क निर्माण का कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 210 करोड़ रुपये के मदररूट सुदृढ़ीकरण तथा लगभग 57 करोड़ रुपये के व्यय की जानकारी भी दी गई है।
मदररूट के सुदृढ़ीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले प्रमुख संपर्क मार्गों की स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों से मुख्य सड़कों तक पहुंच आसान होगी और स्थानीय लोगों के साथ-साथ कृषि एवं अन्य ग्रामीण गतिविधियों से जुड़े लोगों को भी लाभ मिल सकेगा।
वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत 44 किमी सड़क निर्माण पूरा
उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्कता बेहतर बनाने के लिए वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत भी कार्य किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत पांच सड़क कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 44 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा हो चुका है। सीमावर्ती गांवों के लिए सड़क संपर्कता का विशेष महत्व है। इससे स्थानीय निवासियों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और दैनिक आवश्यकताओं से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंचने में आसानी होती है।
इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास स्थानीय आबादी को वहां बनाए रखने और इन क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना भी बढ़ती है।
केंद्र ने उत्तराखंड को हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास जताया है कि उत्तराखंड सरकार की ओर से ग्रामीण सड़क संपर्कता के क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर प्रयासों से निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से वर्तमान में संचालित कार्यों पर लगातार ध्यान दिए जाने से निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। साथ ही, पीएमजीएसवाई के चतुर्थ चरण के द्वितीय चरण के प्रस्तावित कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार होगा।
केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्कता मजबूत करने के इस प्रयास में भारत सरकार और ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से उत्तराखंड को हरसंभव सहयोग एवं आवश्यक समन्वय उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री का जताया आभार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्कता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार की इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चतुर्थ चरण के तहत प्रस्तावित कार्यों को स्वीकृति मिलने के बाद प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्कता को और अधिक सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में आवागमन की सुविधाएं बेहतर होंगी। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन में होने वाली कठिनाइयों से राहत मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गतिविधियों को गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर सड़क संपर्कता उपलब्ध कराई जा सके। पीएमजीएसवाई के तहत प्रस्तावित सड़क एवं पुल निर्माण के कार्य इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
कुल मिलाकर, पीएमजीएसवाई के चतुर्थ चरण के द्वितीय चरण के तहत प्रस्तावित 528 सड़कें और 19 पुल उत्तराखंड के ग्रामीण आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विशेषकर पर्वतीय, दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्कता से स्थानीय आबादी को सुविधा मिलने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकास कार्यों को भी गति मिलने की उम्मीद है।




