देहरादून, 06 नवंबर। हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, गढ़ी कैंट स्थित नींबूवाला में आयोजित 15 दिवसीय विरासत महोत्सव-2026 का शुक्रवार को यादगार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ भव्य समापन हुआ। महोत्सव की अंतिम संध्या में मशहूर गायिका पद्म भूषण सम्मानित ऊषा उत्थुप ने अपने दमदार, जोशीले और लोकप्रिय गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं, पंडित राजन सजौर की शास्त्रीय गायकी और ठुमरी की शानदार प्रस्तुति ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित राजन सजौर की शास्त्रीय गायकी से हुई। उन्होंने राग देश में खयाल गायकी प्रस्तुत करते हुए मध्य लय में एकताल और द्रुत लय में तीनताल पर आधारित दो बंदिशें पेश कीं। उनकी गायकी में राग की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और लयकारी का सुंदर संगम देखने को मिला। हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा ने संगत की। गया घराने का प्रतिनिधित्व करने वाले पंडित राजन सजौर ने अपनी प्रस्तुति से शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा की खूबसूरत झलक पेश की।
इसके बाद मंच पर पहुंचीं मशहूर गायिका ऊषा उत्थुप ने अपनी विशिष्ट आवाज और ऊर्जावान अंदाज से पूरी महफिल को संगीतमय बना दिया। उनके लोकप्रिय गीतों पर दर्शक देर रात तक झूमते नजर आए। उनकी प्रस्तुति में संगीत, उत्साह और मनोरंजन का शानदार संगम देखने को मिला। उनके साथ शुभोजित धर ने की-बोर्ड, नेपाल शाह ने बेस गिटार, सिद्धार्थ चटर्जी ने ऑक्टापैड और संपद सामंत ने लीड गिटार पर संगत की।
पांच दशकों से अधिक समय से संगीत की दुनिया में सक्रिय ऊषा उत्थुप ने अपनी बहुभाषी गायकी और अनूठी शैली से देश-विदेश में पहचान बनाई है। वह 17 भारतीय और आठ विदेशी भाषाओं में गीत गा चुकी हैं। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2011 में पद्म श्री और वर्ष 2024 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
विरासत महोत्सव की अंतिम संध्या में होपटाउन स्कूल की छात्राओं ने भी शानदार ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुति देकर समां बांधा। छात्राओं और शिक्षकों ने विभिन्न वाद्य यंत्रों एवं गायन के माध्यम से सुर, ताल और लय का बेहतरीन समन्वय प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में जसमीरा भूटानी, मिशिका अग्रवाल, गायत्री जुयाल, सान्वी अरोड़ा, गीत सिद्धार्थ डागा, अहेली दत्ता और सुमन आनंद सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। शिक्षकों और छात्राओं की संयुक्त प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
15 दिनों तक चले इस महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शास्त्रीय संगीत, लोककला और सांस्कृतिक जगत के प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से देहरादून के कला एवं संस्कृति प्रेमियों को समृद्ध अनुभव दिया। अंतिम दिन रिच संस्था के संस्थापक आरके सिंह, संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी एवं संस्था की टीम ने कलाकारों, अतिथियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने विरासत महोत्सव-2027 में नए उत्साह और उमंग के साथ फिर मिलने के संकल्प के साथ इस वर्ष के आयोजन को विदाई दी।
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