
1.30 लाख LED लड़ियों का मिला ऑर्डर, 1.05 लाख की आपूर्ति पूरी; स्वाभिमान बेकरी यूनिट ने 2,000 से अधिक गिफ्ट हैंपर बेचकर कमाए 18 लाख रुपये से ज्यादा
350 ग्रामीण महिलाएं LED लड़ियों के निर्माण से जुड़ीं, मिलेट्स उत्पादों के जरिए स्थानीय उद्यमिता को मिल रहा बढ़ावा
देहरादून। दीपावली के त्योहार पर देहरादून की ग्रामीण महिलाएं स्वदेशी उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने स्वदेशी हिलान्स LED लड़ियों और पहाड़ी मिलेट्स से बने गिफ्ट हैंपर के जरिए लाखों रुपये का कारोबार किया है।
विकासनगर के सोरना डोभरी स्थित स्वाभिमान महिला क्लस्टर की महिलाएं मिलेट्स से बने आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार कर रही हैं। इनमें रागी बिस्किट, मंडुआ केक, रागी चॉकलेट, फ्रूट एंड नट्स चॉकलेट और अन्य स्थानीय उत्पाद शामिल हैं। अब तक 2,000 से अधिक गिफ्ट हैंपर की बिक्री से 18 लाख रुपये से ज्यादा की आय अर्जित की जा चुकी है। इस यूनिट से आठ अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।
वहीं, रायपुर के सोडा सरोली ग्रोथ सेंटर में दिव्य ज्योति क्लस्टर की करीब 350 महिलाएं स्वदेशी हिलान्स LED लड़ियों का निर्माण कर रही हैं। क्लस्टर को 1.30 लाख लड़ियों का ऑर्डर मिला था, जिसमें से 1.05 लाख की आपूर्ति पूरी हो चुकी है। शेष 25 हजार लड़ियों का निर्माण जारी है। महिलाओं को प्रत्येक 100 पैकेट तैयार करने पर करीब 700 रुपये की आय हो रही है।
स्वाभिमान बेकरी यूनिट की सदस्य कल्पना बिष्ट ने बताया कि उन्होंने करीब दो वर्ष पहले रीप परियोजना से जुड़कर बेकरी यूनिट शुरू की थी। वहीं, दिव्य ज्योति क्लस्टर की अध्यक्ष ममता कोठियाल के अनुसार, LED लड़ियां करीब 120 रुपये प्रति पैकेट की दर से बिक रही हैं, जबकि इनकी निर्माण लागत 70 से 80 रुपये है।
सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि दोनों क्लस्टर की महिलाएं त्योहार के दौरान आजीविका संवर्धन के कार्यों में जुटी हैं। स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। वे आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
दीपावली पर महिलाओं की यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने के साथ महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।




