
खटीमा में आयोजित तीन दिवसीय आदि रंगोत्सव के समापन समारोह में गीता धामी शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की समृद्ध कला, संस्कृति, लोकपरंपराओं और जीवन-पद्धति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का अवलोकन किया।
गीता धामी ने कहा कि आदि रंगोत्सव भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता का जीवंत प्रतीक है। आधुनिकता के दौर में भी जनजातीय समाज जिस तरह अपनी परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोए हुए है, वह प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति और विरासत के प्रति यह गौरवबोध आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता है।
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