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Home » “आत्मबोध, कर्म और ईश्वर तत्व ही जीवन को सही दिशा देते हैं” — डॉ. रणवीर सिंह
उत्तराखण्ड

“आत्मबोध, कर्म और ईश्वर तत्व ही जीवन को सही दिशा देते हैं” — डॉ. रणवीर सिंह

Pahad ki KhabarBy Pahad ki KhabarSeptember 27, 2026No Comments
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डॉ. रणवीर सिंह ने अपने इस जीवन-दर्शन में कर्म, आत्मबोध, ईश्वर से जुड़ाव और प्रकृति के प्रति मनुष्य की जिम्मेदारी को केंद्र में रखा है। उनका मानना है कि जीवन का वास्तविक आनंद कर्म की साधना, आत्मज्ञान और समय-काल-परिस्थिति के अनुरूप जीवन जीने में है। प्रस्तुत है उनका चिंतन—

मैं आपसे जीवन दर्शन शेयर कर रहा हूँ, कृपया पढ़ेंगे तो अच्छा होगा। 🙏🙏
तो , यह जीवन ईश्वर ने दिया और हमे जीवन में कुछ भी हासिल करने की हिम्मत भी दी, साथ ही मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी बनाया है, जिसको करके खाना चाहिए, बिना करे कुछ भी प्राप्त करना ठीक नहीं होता, अब में इसको कहूँगा की करके मतलब कर्म की पूजा करके जीवन यापन करने की आदत डाल ले, सुर साथ जी सभी जीव जंतु , वृक्ष , झाड़िया और झंकार आदि को मनुष्य के सहारे छोड़ दिया, यह भी कहा की जब तुम अपना पालन पोषण करो तो फिर साथ में इनका भी करेंगे, और सब जीव – वृक्ष आदि मनुष्य को जीवन जीने के लिए सहायक सिद्ध होंगे ।
अब आती है, बात की इस महायुग , चार युगों का एक महायुग है, सतयुग जो की १७,२८,००० वर्षों का , त्रेतायुग १२,९६,००० वर्ष, द्वापर युग ८,६४,००० वर्ष और जो यह कलियुग , कलि काल हे इसका काल खंड केवल ४,३२,००० वर्षों का ही है, इसको भी चार खंडों में बांटा गया है, १,०८,००० वर्ष @ ४ , यह इसलिए की धरती के महायुग का यह अंतिम पड़ाव है, तो हो सकता हैं कि इसका समय निर्धारण खत्म होने से पहले ही समाप्त करना पड़े, क्योंकि इस युग का आरंभ तो हुआ, अभी ५,३०० वर्ष हुए, परंतु पाप कर्म का बोलबाला, दिखावा और अहंकार, झूठ फरेब, महिलाएं अपनी ताक़त को दिखायेंगी, अपनी संस्कृति को नहीं समझ कर धीरे धीरे बेआबरू होकर अपने हुकूमत को आगे बढ़ाने के लिए फिर पुरुष वर्ग पर पिछले सब अत्याचार की घटनाएं भी बढ़ती जा सकती हैं, अपने चरित्र की नग्नता को उजागर कर जियेंगी , पुरुष केवल उनके गुलाम होंगे, यह घटनाये घटेंगी और समाज त्राहि त्राहि करेगा, जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों में धीरे धीरे मुस्लिम शासन बढ़ेगा और मुस्लिम और ईसाई पूरे संसार को नष्ट करने के कारक बनेंगे । कहा जाता है की श्री भगवान कल्कि अवतरण तब होगा, जब मनुष्य की अधिकतम उम्र ३० वर्ष और रोग दोष से पीड़ित, महिलायें छ वर्ष में माँ बन जायेंगी, अमनुष्यता के कारण विवाह के नियम नहीं होंगे, संतान भी बहशी हो जायेगी, विवाह में कोई जाँच नहीं होगी, कोई रिश्ते नाते नही होंगे, सुर मनुष्य की हाइट मात्र ३ फुट की रह जायेगी।
जो वर्तमान में हम भी विश्व में विकास की बात करते हैं वही विनाश करेगा ।

अब आगे:- आत्मा अजर अमर है, शरीर नश्वर है, आत्मा को परमात्मा से प्रेम का अनुभव होता है, तभी परमात्मा से कनेक्ट होता है, परमात्मा जो करता है उसका जीवन के साथ उस शरीर का कोई मेल जोल नहीं होता, क्योंकि जो शरीस करता है वह आत्मा को प्राप्त नहीं करता, उसको तो पंचतत्व के रूप को फिर पाँच तत्व में ही खत्म होना होता हैं, इसलिए शरीर को स्वस्थ रखना, स्वच्छ रखना, कर्म के साथ जोड़ना और इसके साथ ही शरीर के तृप्ति के लिए , भोजन , भोग और उसका सेवन करना आदि बताया गया है, जानकारी के अनुसार यदि शरीर का उपयोग नहीं करेंगे तो फिर जन्म की दिशा विपरीत होती चली जायेगी, इसी तरह यदि आत्मा को परमात्मा की प्राप्ति के लिए प्रेरित नहीं करेंगे तो शरीर भोग्य होगा, पर अगले जन्म में काल के ग्रास बन जाएँगे, अर्थात् सातों नरकों के लोकों में ही भटकना पड़ेगा , पृथ्वी भी नहीं मिलेगी ।
अब हम आज जो देख रहे वह सौ वर्ष बाद अति भयानक हो गया होगा, इस तरह आगे भी देनादुनिक को देखकर ख़राब स्थिति में ही यह संसार बढ़ता जाएगा ।
जीवन में कष्ट का कारण यह नहीं की हम ईश्वर तत्व की अनदेखी कर चले, तुम्हारे लिए क्या जरूरी हैं, वह उम्र, काल, आवश्यकता आदि के अनुरूप ही होगा, अगर कोई भी चला जाय, तो सहारा बन कोई आयेगा, प्रत्यक्ष नहीं तो परोक्ष रूप से भी आयेगा तो भी यह ईश्वर तत्व ही होगा, इसलिए बस यह मानों की हमारे जीवन में हम कोई भी विधि जो विधाता ने बनाई उसके विरुद्ध नहीं जायें, क्योंकि अगर विरुद्ध जाये तो थोड़ा आनंद ले सकते हैं पर फिर संतोष नहीं होगा।।
जीवन को सुंदर बनाने के लिए कर्म की तपस्या करनी होगी, और उसके जाप को सिद्ध कर सकते हैं केवल आत्मा के बोध से, क्योंकि परमात्मा तो आत्मा से छियासठ टाइम छोटा है, अगर हमारे को आत्म ज्ञान ही नहीं तो परमात्म ज्ञान कैसे होगा।
समय – काल- परिस्थिति के अनुसार जीवन का आनंद लें, आगे चले ।।
💐💐💐💐

 

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